SATTU MILKSHAKE

Sattu…this name reminds us of Bihar. Sattu–roasted gram flour is not just food in Bihar, it is an entire way of life.
Now-a-days all are health-conscious and Sattu has gained kudos for its great nutritional benefits.
Rich in minerals, proteins and fibre, low of glycemic index, Sattu is said to be the most economical antidote to diabetes.

Before I jump to one of the yummiest milkshake, let us shake hands with two popular Sattu drinks– meetha (sweet) and namkeen (savory).

SATTU SWEET DRINK

Sattu powder 2-3 tsp
Jaggery 2 tsp
Black salt 1/2 tsp (optional )
Cold water 1 glass

Add Sattu and jaggery in cold water and mix well, add black salt if you want.
Drink..sip…gulp…enjoy…

SATTU NAMKEEN DRINK

Sattu powder 2-3 tsp
Black pepper 1/4 tsp
Black salt 1/4 tsp
Roasted cumin powder 1/4 tsp
Lemon juice 3-4drops
Salt
Mint leaves chopped (optional)
Coriander leaves chopped (optional)
Green chilles chopped (optional)
Finely chopped onion (optional)

Add Sattu powder in cold water along with other ingredients. Traditionally green chilly and onion are added.  It’s upto you to add or not. Sip it and feel blessed….

SATTU MILKSHAKE

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Sattu milkshake is the coolest one…once you finish the glass, the feeling that dances in the mind is shantiii, param shanti, freshhhhh……
So check this out…

Sattu 2 tbsp
Milk 11/2 cup
Rose syrup or Roohafza 2 tbsp
Cardomom powder a pinch
Dry fruits 1 tsp
Crushed ice

Mix all the ingredients in blender.
It will turn into a smooth consistency.
Garnish with nuts and serve chilled.

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Sattu is considered a detox food that cleanses the system and aids in weight loss. An energising drink that not only quenches thirst but also protects us from heat strokes due to intense summer heat.

Try and let me know through your comment how it was….

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MERI DOST (POEM)

An Alzheimers patient is like a grown up child, who talks like a child and behaves like a child. They try to recall all that has deleted from their memory. The sadness of forgetting and helplessness of not able to do anything, makes their loved ones more responsible towards them…which they also reciprocate, in some or other way….
Let all be blessed with good health…
Today on Poetic Friday sharing with you my poem ‘MERI DOST’, sharing with you the relationship famous as the institution known as marriage…

मेरी दोस्त

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तुम से रूठता हुं
तुम को देखकर खुश होता हुं,
तुम कौन हो मेरी बोलो ?
तुम क्या मेरी दोस्त हो ?

तुम कहती हो, तुम मेरी मां नही हो
पर उनकी ही तरह तो खाना खिलाती हो,
बालो को संवारती हो, प्यार से समझाती हो
तो तुम क्या मेरी दोस्त हो ?

बहन नही, बेटी नही हो, तुम ही तो कहती हो
पर उनकी ही तरह मुझसे कितनी बातें करती हो,
गाना सुनाती हो, मिठाई भी देती हो
तो तुम क्या मेरी दोस्त हो ?

तुम कहती हो, तुम मेरी साथी हो
अब समझ गया मैं, तुम मेरी क्या होती हो,
मां, बहन, बेटी, सब मिलकर बनी, तुम मेरी साथी हो
साथी, तुम ही तो मेरी दोस्त हो ।

जब डरूं, तुम साथ में रहना साथी
जब हाथ बढाऊं, जोर से पकड़ लेना साथी,
मैं किसी को नही जानता, तुम ही मेरी दोस्त हो
सबसे कह दो, तुम ही तो मेरी दोस्त हो।।

NILANJANA (POEM)

Today on Poetic Friday, my poem NILANJANA stands humbly, with an appeal to take the correct step at correct time.
Fight for your love, before it is too late. Don’t succumb under social pressure and don’t take a back seat, when your love needs you the most. Stand with her, stand for her….be a man…

निलाँजना
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पहली बार जब हम मिले, याद है मुझे वो लम्हें ,
छुप- छुप के कई बार देख रहा था मैं तुम्हें ।
तुमने हंस के पुछा था,पढ़ने मे मन नही लगता क्या तुम्हारा ?
सकुचा कर मैंने कहा, कोशिश कर रहा हुं ,तुम मत हसंना।।
कैसी हो तुम, मेरी निलाँजना?

इतनी चुलबुली की तुम्हारी एक हंसी से ,
सारी परेशानी उड़ जाती है अंतरिक्ष में ।
तुम्हारे चेहरे की असाधारण ताजगी ,
मेरे सुखे मरूभूमि में भर देती समस्त खुशी ।।
कैसी हो तुम, मेरी निलाँजना ?

मेरे जीवन मे बहार बन कर आई तुम ,
खुशियां तुम्हारे संग कभी हो नहीं सकती गुम।
तुम्हारी आंखो की वो शरारत ,
जीना सिखा दिया मुझे , जगा के सब हसरत ।।
कैसी हो तुम, मेरी निलाँजना?

जब भी टूटने लगता था मैं, कहती थी तुम ,
जीतोगे जीतोगे जीतोगे तुम, हारना तो है जुम॔ ।
तुम तो हो मेरी धड़कन, मेरी हर एक श्वास ,
तुमने थाम के मेरा हाथ, पहुंचा दिया मुझे मेरे लक्ष्य के पास ।।
कैसी हो तुम, मेरी निलाँजना?

सफलता के उच्च शिखर मे पहुंचकर ,
चला आया हुँ, मै तुम्हें तुम्हारे हाल में  छोड़कर ।
अफसोस उस वक्त तुम रोई क्यों नहीं ?
मजबूर और विवश करके मुझे रोका क्यों नहीं ?
कैसी हो तुम, मेरी निलाँजना?

जानता हुँ तुम्हारे स्वाभिमान को तोड़कर ,
खुश रहने की सिफ॔  कोशिश करता हुँ मैं , सब जोड़कर ।
अपना सारा प्यार दुआएं तो तुम मुझे देकर चली गई ,
अपने साथ सिर्फ मेरे दिये हुए गम लेकर गई ।।
कैसी हो तुम, मेरी निलाँजना ?

आज जब मंच पर पुछते हैं सब मेरी सफलता का राज ,
मुझे संवारने मे किसका है सबसे बड़ा हाथ।
हंस कर सबकी स्तुति करता हुँ मैं ,
बस असली हकदार का नाम कभी नही ले पाता हुँ मैं ।।
कैसी हो तुम, मेरी निलाँजना?

सबके सामने दिखने वाला मैं बड़ा आदमी ,
मै हुँ तुम्हारा सबसे बड़ा अपराधी, 
एक बार माफी मांगना चाहता हुँ मैं ,
सालों से सोया नहीं , एक बार रोना चाहता हुँ मैं
सालों से सोया नहीं , एक बार रोना चाहता  हुँ मैं।।
कैसी हो तुम, मेरी निलाँजना?
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